अभिमान और स्वाभिमान
अभिमान और स्वाभिमान ( written by my beloved friend late Ajay Sharma) रविवार की शुभकामनायें स्वीकारिये ! आप आत्म चिंतन करते हैं क्या ? क्या आप अपने होने का अर्थ जान गए हैं ! क्या आप स्व + अर्थ जान गए हैं ! क्या आप अपना स्वार्थ जान गए हैं ! आपके स्वार्थ का परिमाण ( quantum ) शून्य ( zero ) है अथवा अनंत ( infinite ) है ! आपके स्वार्थ की अनंतता ने क्या आपको अभिमानी बना दिया है ? या आपके स्वार्थ की शून्यता ने आपको स्वाभिमानी बना दिया है ? क्या आप स्वयं को सर्वश्रेष्ठ समझते हैं ? क्या आप स्वयं को तुच्छ समझते हैं ? आइये ! जानने की कोशिश करें -- अभिमान ओर स् वाभिमान में कया भिन् नता है ? तत्पश्चात हम ये निष्पत्ति ( conclusion ) करने का प्रयास करेंगे हमारे इर्द गिर्द कौन कितना उत्कृष्ट के नज़दीक और कौन कितना निकृष्ट की तरफ है ! अभिमान दूसरे से अपने को श्रेष्ठ ...